बुधवार, 3 फ़रवरी 2021
शनिवार, 11 अप्रैल 2020
कोरोना है अभी वहीं रहना है
मोबाइल में एक वीडियो वाइरल होता है जिसमे छत्तीसगढ़ के मजदूर जो अन्य प्रदेश में पलायन किये है उनका है। चार पांच लड़के उसे देख कर आपस मे चर्चा करते है।
मोबाइल को सभी देखने लगते है एक कहता है---
(इस लिंक को पहले देखते हुवे शूटिंग करना है)
लड़का 1 : गांव में सचिव के पास जानकारी देनी रहती है। पर ये अपने लोग होशियार हैं। बिना बताए चले जाते हैं। इससे ज्यादा काम छत्तीसगढ़ में है लेकिन ये लोग यहां नहीं करेंगे।
लड़का 2 : यहाँ ये लोग जितना कमाते हैं उसको दारू पीने में ही लगा देते हैं, फिर बोलते हैं कि कुछ कमाई ही नही है छत्तीसगढ़ में।
लड़का 3 : छत्तीसगढ़ में क्या कमी है जो बाहर पलायन करते हैं वहां जाके बंधुवा मजदुरी करना मंजुर है इन लोगो को गांव घर में काम करने मे शरम आता है अभी फंस गये तो छत्तीसगढ़ याद आ रहा है
ऐसे ही हाल विदेश से आने वाले का है जब बुरा वक्त आया तो देश याद आता है
लड़का 2 : ये लोग वहीं अपनी व्यवस्था बनाये इनकी यहां कोई जरूरत नहीं सरकार जब लाकडाऊन कर रही थी तब ये लोग दारू पीयें थे या ईटा बना रहे थे
लड़का 1 : जब गये थे उस समय इन लोग को छत्तीसगढ़ मे काम नहीं मिल रहा था खाने को नहीं मिल रहा था तो अभी छत्तीसगढ़ में आके क्या खायेंगे
लड़का 1 : क्यो जाते हो अब वहीं रहो तुम्हारा राशन कार्ड भी रद होना चाहिए।
तभी एक आदमी वहाँ आता है वह काफी समय से इनकी बाटे सुन रहा था उसने छत्तीसगढ़ी में उनसे कहा ---
आदमी 1 : जादा कमाई के फेरा म , धर के गे रहा बोरा
अब मुसीबत के घरी म , याद आवत हे गांव के कोरा ।
अब तुंहर ले विनती हे जिहा हव चुपचाप बैठ के भूंजा होरा ।
बाहर ले आके कोरोना ल लाके छत्तीसगढ़ म झन दांत निपोरा।।
समझे ग भैया समारू सुने ओ दीदी मनटोरा ।।
समारू : अब आँख खुली की अभी भी आँख में पट्टी बंधी है... गाव में रहे. औऱ अपने राज्य में रह के कार्य करे, अपने राज्य के विकास में सहयोग करे, न कि किसी बाहरी लोगों के हवाले छोड़े...
मनटोरा : छत्तीसगढ़ म काम के कमी नई हे ग भाई।तोर भाषा ह ठीक नई हावय।काकर से पूछ के गए रहा तुमन ग??
(लड़का 2 लड़का 1 से कहता है )
लड़का 2 : सरकार इनके लिए कुछ करें भाई, तुम कुछ करो न
लड़का 1 : भाई जहां है वहीं कि सरकार उनकी मदद कर सकती हैं।। पहली बात तो इनको भेजा कौन है, इनका बात करने के तरीका देखिए, ये सभी मंत्री मुख्यमंत्री को खुलेआम गाली दे रहे हैं, ऐसे में इनका मदद कौन करेगा,
लड़का 3 : जहा पर हों आप वहीँ पर रहो। अपनी जवाब दारी में गये हों सरकार को बताया था कि हम कमाने बाहर जा रहें हैं बोलके।
शनिवार, 30 नवंबर 2013
प्रकृति पूजा का र्पव है करमा
करमा पूजा प्रकृति र्पव है। यह प्रकृति की पूजा करने का संदेश देता है।
भादो शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन करमा का पर्व गाव - गाव में पूरे विधि विधान और अनुष्ठान के साथ मनाया जाता है। करमा पर्व कृषि और प्रकृति के साथ साथ भाई बहनो के अटूट बंधन से जुड़ा पर्व है।
उक्त बातें भाजपा नेता दीनानाथ खुंटे ने कही। वे रविवार को ग्राम पंचायत पिण्डरी में आयोजित करमा पूजा महोत्सव में शामिल हुए थे।
इस पर्व में वे देर रात को पहुचे | सबसे पहले उन्होंने करमासेमी मईया को विधिवत पुजन किया और ग्रामीणों के साथ बैठ कर करमा नृत्य का आनंद लिये।
इस दौरान उन्होंने करमा पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत मातृ पूजा का देश है, आदि काल से पूर्वज प्रकृति की पूजा करते रहे हैं जो अब भी जारी है।
करमा पूजा धार्मिक आस्था पर र्निभर करता है। करमा पूजा से जीवन में सुख व समृद्धि प्राप्त होती है ऐसा सभी मानते हैं। देर रात्री में क्षेत्र के जाने माने नेता दीनानाथ खूंटे के आगमन से गाव के लोगों में नई उर्जा का संचार हुआ और गांव के लोगों ने उत्साह के साथ रातभर करमा नृत्य किया और सुबह तालाब में करमासेमी मईया का विसर्जन किया गया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच श्रीमती ललीता महेस, शशिचंद महेष, शीवलाल खुंटे, रामदेव कुर्रे, संजय महंत, भगवान दास, बुंदरू सहित ग्रमवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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